कार्य-कारण-जगत्-बीज़त्व-विचार
शिक्षण-विधि-सोपान
कार्य-कारण-जगत्-बीज़त्व-विचार इस विश्व वृक्ष को देखकर विचारक मीमांसक तर्क करता है कि इतना बडा विश्व
वृक्ष किस बीज़ से उत्पन्न हुआ होगा, तो उत्तर बनता है कि यह ब्रम्ह बीज़ से
उत्पन्न हुआ है । परन्तु बीज़त्व के लिये छ: अवयव वाँक्षनायें नामत: एक- देश, दो- काल, तीन- संस्कार, चार- खाद-आदि, पाँच- उपादानिता, छ:- विकारी स्वभाव होती है । शास्त्र उपदेश प्रशस्थ करते हैं, कि ब्रम्ह में संस्कार सम्भव नहीं हैं । शास्त्र उपदेश हैं कि ब्रम्ह
निर्विकार है । उपरोक्त स्थिति के होते हुये ब्रम्ह बीज़ नहीं बन सकता है ।
जगत्-वृक्ष का बीज़ माया शक्ति है । जगत् के पदार्थ रूपों के सन्दर्भ में कार्य-कारण
का विचार होता है । माया शक्ति और ब्रम्ह की सेवक रूप में है । इस स्वामी-सेवक रूप
के आलोक में ही कार्य-कारण की स्थिति है । विश्व-वृक्ष की उपादानिता ब्रम्ह है, निमित्त कारण माया शक्ति है । ...... क्रमश:
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